जाने कितनी सदियोंसे खड़ा था बरगद का वो पेड़
उस बूढ़ी औरत की तरह
जो उसी पेड़ के निचे बैठके इमली के गोले और अमरुद बेचा कराती थी
जैसे तैसे माँ से पैसे लेकर
इमली लेने दौड़ती थी
मुझे सामने देख
उसके चेहरेपर हंसी आती थी
अपने झुर्राये हाथोंमें मेरे हाथ पकड़ना
उसे अच्छा लगता था
मेरे कॉपियोंसे जादा तो
उसके हाथोंपें रेषांये थी
मेरे चेहरेपे अपना हाथ फेरते
उसकी आँखोंमे आँसू आते थे
इमली के गोले के साथ
मेरे हाथ में अमरुद भी थामा करती थी
बरसोँ बाद मार्केट में अमरुद से भरी टोकरी दिखी
तब उसकी याद आयी
यांदें भी अजीब होती है
जब उनकी मर्जी हो तभी आती है
माँ से पूछा तो पता चला
वो मर गयी
और वो बरगद का पेड़ भी
किसी बारिश में उसकी टहनी पड़ी थी
उस बूढी औरत के सर पर
बस्तीवालोंने तो वो पेड़ ही काट डाला
खून का बदल खून
यही जमाना है अब
उस बूढ़ी औरत की तरह
जो उसी पेड़ के निचे बैठके इमली के गोले और अमरुद बेचा कराती थी
जैसे तैसे माँ से पैसे लेकर
इमली लेने दौड़ती थी
मुझे सामने देख
उसके चेहरेपर हंसी आती थी
अपने झुर्राये हाथोंमें मेरे हाथ पकड़ना
उसे अच्छा लगता था
मेरे कॉपियोंसे जादा तो
उसके हाथोंपें रेषांये थी
मेरे चेहरेपे अपना हाथ फेरते
उसकी आँखोंमे आँसू आते थे
इमली के गोले के साथ
मेरे हाथ में अमरुद भी थामा करती थी
बरसोँ बाद मार्केट में अमरुद से भरी टोकरी दिखी
तब उसकी याद आयी
यांदें भी अजीब होती है
जब उनकी मर्जी हो तभी आती है
माँ से पूछा तो पता चला
वो मर गयी
और वो बरगद का पेड़ भी
किसी बारिश में उसकी टहनी पड़ी थी
उस बूढी औरत के सर पर
बस्तीवालोंने तो वो पेड़ ही काट डाला
खून का बदल खून
यही जमाना है अब
प्रशंसनीय लिखावट 👌👌
ReplyDeleteWah wah... mast ekdum
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