Thursday, 28 July 2016

तरसते है तुम्हारे लिए
एक बार के दीदार के लिए
कभी वक़्त का साथ नही मिला
तो तुम्हारा नाम काग़ज़ पे लिख के
उसी को चूमा करते है

वक़्त भी तो behaviour देखो
तुम्हारे साथ उसका पता ही नही चलता
पर तुम्हारे बग़ैर हर लम्हा मानो लम्बे que सा लगता है
जो कभी आगे बढ़ती ही नहीं

Wednesday, 20 July 2016

राह चलते कुछ फ़रिश्ते मिले थे
आदमियों जैसे लग रहे थे
राह चलते किसी का हाथ थामे उसे रास्ता दिखा रहे थे
रात का समय था इसलिए कुछ दिखायी नही दिया
आज सुबह पता चला
जब वहाँ पे पुलिस के घेरे में लाश दिखी
फ़रिश्ते नहीं आदमी ही थे

Thursday, 7 April 2016

तुम्हारी यादोंको दिल ने ऐसा थामा था 
हर पल लगता था 
कहीं कोई मोड़ तुम्हें वापस ले आएगा 
हर आहट पे लगता था 
तुम वापस आ गए 
कितनी ग़लत थी मैं 
गर मेरा होता तो शायद वापस आ भी जाता 
एक आख़री उम्मीद थी 
आज वो भी टूट गयी 
तुम्हारे दिल ने गवाही दे दी 
किसी और के प्यार की 

Wednesday, 24 February 2016

वादे तो बहुत किए थे तुमने 
साथ निभाने के 
साथ निभाया भी 
बिना वक़्त दिए 
जब वक़्त माँगा 
तो हँसके इतना ही कहा था तुमने 
वादा तो सिर्फ़ साथ निभाने का था 
वक़्त देने का नहीं
--अनघा

Saturday, 30 January 2016

कुछ बातें अनकहि
आँखोंसे कहीं थीं
शायद वहीं रह गयी 
जहाँ पे तुमने मोड़ लिया था

कुछ बातें 
तुमने कहीं थी
सीधी दिल पे लगी थी
आज भी साथ है 

बहोत चाहा था 
उन्हें भी उसी मोड़ पे छोड़ दूँ
कोशिश भी की थी 
पर सच कहा है किसने 
इंसान साथ नहीं देते 
पर कही बातें साथ रेहती है 

Monday, 4 January 2016

एक तरसता लम्हा बहोत कुछ सिखा गया
कुछ हसीन पलोंको पीछे छोड़ता गया
वक़्त बेमानी सा हो गया
जीना बेमतलब हो गया 
कुछ उम्मीद बाक़ी थी
तुम्हारे साथ चलनेकि आस थी 
सब कुछ साथ ले गया
एक तरसता लम्हा बहोत कुछ सिखा गया 

एक पल के लिए लगा मानो दुनिया हाथ में आ गयी
चाँद भी हाँथोंमें थम गया
पर वक़्त का पलड़ा भारी हो गया 
देखते देखते वक़्त की रेत हाथोंसे छूटती गयी 
दिनोंका हिसाब लम्होमे में पलट गया
एक तरसता लम्हा बहोत कुछ सिखा गया 
--अनघा