Wednesday, 20 May 2020

एक ख़ालीपन

शाम के साथ आता ख़ालीपन 
वक़्त कटते कटता नहीं 
हर जगह सिर्फ़ ख़ालीपन 
तुम्हारे बग़ैर फैला हुआ ख़ालीपन 
बेमानी सी ज़िंदगी का ख़ालीपन 
कोई आँसू भर नहीं सकता ऐसा ख़ालीपन 
किसिका इंतज़ार करता ख़ालीपन 
अँधेरे का साथी ख़ालीपन 
तनहाई से आदी ये ख़ालीपन 
जाने वो कौनसीं शाम होगी 
जब ये ख़ालीपन जगमगा उठेगा 
जाने वो कौनसा पल होगा 
जब ये तनहाई ख़त्म होगी 
तुम्हारे आने का पल 
वही होगी नई राह 
वही होगा नया उजाला 
-अनघा 


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