नदिया के किनारे बसे महलोंमे ख़्वाब बसा करते थे
ऊँचे पेड़ोंके पीछे से झाँकते थे
लुकाछुपी खेला करते थे
कभी नदिया किनारे खेलते दिखाई पड़ते थे
अमरुद के पेड़ से चोरी करते हुए भी देखा था उन्हें
दोस्तोंके बीच अनबन होती थी और चुटकियोंमें ख़तम भी होती थी
सुबह की किरणे उन ख्वाबोंको सेहलाती थी
बारिश उन्हें भिगोती थी
सर्दियों के मौसम में अलाव जलाकर उनमे भुट्टे सेखंते भी देखा है
ऊँचे पेड़ोंके पीछे से झाँकते थे
लुकाछुपी खेला करते थे
कभी नदिया किनारे खेलते दिखाई पड़ते थे
अमरुद के पेड़ से चोरी करते हुए भी देखा था उन्हें
दोस्तोंके बीच अनबन होती थी और चुटकियोंमें ख़तम भी होती थी
सुबह की किरणे उन ख्वाबोंको सेहलाती थी
बारिश उन्हें भिगोती थी
सर्दियों के मौसम में अलाव जलाकर उनमे भुट्टे सेखंते भी देखा है
लग रहा था सब ऐसे ही हसीं होगा
कहाँ जानते थे बचपन के ख्वाब बचपन में ही छुट़ जाया करते है
वक़्त के साथ ख़्वाब भी बड़े हो गए
नया शहर , नयी जगह के हो गए
अब नदी किनारे दिल नहीं लगता उनका
न पेड़ के अमरुद तोडना अच्छा लगता है
अब तो ख्वाब भी स्टेटस के आते है
नया शहर , नयी जगह के हो गए
अब नदी किनारे दिल नहीं लगता उनका
न पेड़ के अमरुद तोडना अच्छा लगता है
अब तो ख्वाब भी स्टेटस के आते है
अब न जाने रात को नींद क्यों नहीं आती
कभी वक़्त मिले तो पकड़लो उन ख्वाबोंको जो बचपन में छुट गए थे
एक दिन गुजरके देखो उनके संग
बस एक दिन
बहुत खूब.... :)
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