किसी दिन वक्त ने दरवाजे पर दस्तक दे दी
कुछ भूले लम्हे , जो मेरे पास पड़े थे, लेने आया था
उसे अंदर लिया
चाय बिस्कुट खिलाये
पर माना नहीं
तुम्हारी यादें कैसे देती उसे ?
पर उसका हिसाब अधूरा था
उसके KRA का सवाल था
आखिर हमने मांडवली की
मैंने तुम्हारे लम्हे उसे उधार दे दिए
और ब्याज़ में बचपन की कुछ यादें माँगी
सस्ता पड़ा सौदा मुज़े
तुम्हारी यादोंसे मुरज़ाये दिल में
अब मेरा बचपन भी रेहता हैं
हँसता खेलता मेरा बचपन
कुछ भूले लम्हे , जो मेरे पास पड़े थे, लेने आया था
उसे अंदर लिया
चाय बिस्कुट खिलाये
पर माना नहीं
तुम्हारी यादें कैसे देती उसे ?
पर उसका हिसाब अधूरा था
उसके KRA का सवाल था
आखिर हमने मांडवली की
मैंने तुम्हारे लम्हे उसे उधार दे दिए
और ब्याज़ में बचपन की कुछ यादें माँगी
सस्ता पड़ा सौदा मुज़े
तुम्हारी यादोंसे मुरज़ाये दिल में
अब मेरा बचपन भी रेहता हैं
हँसता खेलता मेरा बचपन
--अनघा
व्वा.... अप्रतिम 😀
ReplyDelete