तुमसे मिलनेकी चाहत बड़ी सख़्त थी
लगता था नहीं मिलुंगी तो दुनिया डूब जाएगी
कितने दिन , कितने साल ऐसेही गुज़र गये
न हम मिले , न दुनिया डुबी
पर जब मिलनेका वक्त आया
तो मानो जान गले में अटक गयी
दो पल का ही मिलाना था
उसमें दुनिया इधर की उधर हो गई
मेरा वक्त तो अभीभी वहीं ठेहरा है
लगता था नहीं मिलुंगी तो दुनिया डूब जाएगी
कितने दिन , कितने साल ऐसेही गुज़र गये
न हम मिले , न दुनिया डुबी
पर जब मिलनेका वक्त आया
तो मानो जान गले में अटक गयी
दो पल का ही मिलाना था
उसमें दुनिया इधर की उधर हो गई
मेरा वक्त तो अभीभी वहीं ठेहरा है
उन्ही दो पलोंमें
अनघा
Nice
ReplyDeleteAmazing!! Mera waqt to abhi bhi thehra hai unhi do palon mein. Wow.
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