आज भी शाम खाली है
पुरे दिन की तरह,
तुम्हारे आने की हर आहट झुठी है
तुम्हारे वादों की तरह,
काश वो लम्हा पकड़ पाती,
जब तुमने कहा था,
'कल मिलते है '
शायद उस नील आसमां के मालिक ने भी सुन लिया
अनाडी कहीं का ,
तुमने उससे नहीं मुझसे कहा था
समझा ही नहीं वो
पुरे दिन की तरह,
तुम्हारे आने की हर आहट झुठी है
तुम्हारे वादों की तरह,
काश वो लम्हा पकड़ पाती,
जब तुमने कहा था,
'कल मिलते है '
शायद उस नील आसमां के मालिक ने भी सुन लिया
अनाडी कहीं का ,
तुमने उससे नहीं मुझसे कहा था
समझा ही नहीं वो
Your words are terrific Ana
ReplyDeleteYour words are terrific Ana
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