एक तरसता लम्हा बहोत कुछ सिखा गया
कुछ हसीन पलोंको पीछे छोड़ता गया
वक़्त बेमानी सा हो गया
जीना बेमतलब हो गया
कुछ उम्मीद बाक़ी थी
तुम्हारे साथ चलनेकि आस थी
सब कुछ साथ ले गया
एक तरसता लम्हा बहोत कुछ सिखा गया
एक पल के लिए लगा मानो दुनिया हाथ में आ गयी
चाँद भी हाँथोंमें थम गया
पर वक़्त का पलड़ा भारी हो गया
देखते देखते वक़्त की रेत हाथोंसे छूटती गयी
दिनोंका हिसाब लम्होमे में पलट गया
एक तरसता लम्हा बहोत कुछ सिखा गया
--अनघा
Bahot khoob. !!! :-)
ReplyDelete-Deepak
बहोत खूब 👌
ReplyDeleteबहोत खूब 👌
ReplyDelete